महाराष्ट्र निकाय चुनाव: AIMIM का दमदार प्रदर्शन, ओवैसी की बढ़ी ताकत

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हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पार्टी ने 13 नगर निगमों में 120 से अधिक वार्डों में जीत दर्ज की है, जो पिछले चुनावों में जीते गए 56 वार्डों की तुलना में दोगुना से भी अधिक है।

यह महाराष्ट्र में AIMIM का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। कई नगर निगमों में पार्टी ने समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) जैसी स्थापित पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है।

15 जनवरी को हुए चुनावों में AIMIM ने 29 में से 24 नगर निगमों में उम्मीदवार उतारे थे। सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन छत्रपति संभाजीनगर में देखने को मिला, जहां पार्टी ने 33 सीटें जीतकर नगर निगम में दूसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में अपनी जगह बनाई।

मालेगांव में पार्टी को 21 सीटें, नांदेड़ में 14, अमरावती में 12, धुले में 10 और सोलापुर में 8 सीटें मिलीं। मुंबई महानगर क्षेत्र में भी AIMIM ने राजनीतिक रूप से अहम बढ़त दर्ज की, जहां मुंबई और मुंब्रा में पार्टी को पांच-पांच सीटें हासिल हुईं।

इसके अलावा नागपुर में 7, अहमदनगर और जालना में 2-2, जबकि परभणी और चंद्रपुर में 1-1 वार्ड में जीत मिली।

AIMIM ने महाराष्ट्र में पहली बार 2012 में नांदेड़ नगर निगम चुनाव के जरिए सफलता का स्वाद चखा था। तब पार्टी ने 81 सदस्यीय निगम में 11 सीटें जीतकर तेलंगाना के बाहर अपनी पहली चुनावी जीत दर्ज की थी।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी की महाराष्ट्र इकाई में आंतरिक मतभेद भी उजागर हुए थे। चुनाव से पहले मुंबई इकाई के अध्यक्ष फारूक शबदी के इस्तीफे और प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज़ जलील को मिली धमकियों ने गुटबाज़ी को सामने ला दिया था।

AIMIM के उभार को समाजवादी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन से भी जोड़ा जा रहा है, जो कई शहरी इलाकों में उसी मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही थी। दिलचस्प बात यह है कि AIMIM ने MNS और NCP (SP) दोनों से ज्यादा सीटें हासिल की हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि जनता उन नेताओं से नाराज़ थी जो वर्षों से जीतने के बावजूद जमीनी मुद्दों पर काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि जनता ने ओवैसी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि AIMIM का समर्थन आधार अब केवल मुस्लिम मतदाताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के हिंदू मतदाता भी पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। कई गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत इस बदलाव का संकेत देती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक AIMIM ने मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि मुंबई-ठाणे क्षेत्र में शुरुआती पैठ बना ली है। 125 से अधिक वार्डों में जीत या बढ़त के साथ पार्टी कई नगर निगमों में संभावित ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ सकती है।